Saturday, February 4, 2023

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त-Directive Principles In Hindi

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त-Directive Principles In Hindi




भारतीय सविंधान के भाग 4 , अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्तों का उल्लेख किया है। ये इच्छा पर निर्भर करते है।
इन्हे वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। इनके पीछे राजनितिक मान्यता है।
राज्य के नीति निर्देशक तत्व जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्व हैं।

 


राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त-Directive Principles In Hindi


राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त



सर्वप्रथम ये आयरलैंड के संविधान मे लागू किये गये थे। ये वे तत्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए है। भारतीय सविंधान के भाग 3 तथा 4 मिलकर संविधान की आत्मा तथा चेतना कहलाते है। इन तत्वों में संविधान तथा सामाजिक न्याय के दर्शन का वास्तविक तत्व निहित हैं। निति निर्देशक तत्व कार्यपालिका और विधायिका के वे तत्व हैं, जिनके अनुसार इन्हे अपने अधिकारों का प्रयोग करना होता है। वे राज्य के लिये ऐसे सामान्य निर्देश है कि राज्य कुछ ऐसे कार्य करे जो राज्य की जनता के लिये लाभदायक हो। इन निर्देशों का पालन कार्यपालिका की नीति तथा विधायिका की विधियाँ से हो सकता है।

 

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त -कुछ परिभाषाएँ



1. डॉ राजेंद्र प्रसाद अनुसार "राज्य निति निर्देशक सिद्धांतो का उदेश्य जनता के कल्याण को प्रोत्साहित करने वाली सामाजिक व्यवस्था
का करना है। "
2. वियर ने "इन्हे नैतिक उपदेश मात्र कहा है।"

हम भारत के निति निर्देशक तत्वों या सिद्धन्तो को निम्नलिखित अनुच्छेदों द्वारा भी समझ सकते है ,जिनमे इनका उल्लेख किया है। ...

 

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त - सम्बंधित अनुच्छेद 



अनुच्छेद36  परिभाषा
अनुच्छेद37  इस भाग में कहा गया है की इन उपबंधों को किसी भी न्यायलय में बाध्यता नहीं दी जाएगी किन्तु फिर भी राज्य  के प्रशासन के लिए ये मूलभूत माने जाएंगे।
अनुच्छेद38  राज्‍य लोक कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा
अनुच्छेद39  राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्‍व
अनुच्छेद39क  समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता
अनुच्छेद40   ग्राम पंचायतों का संगठन
अनुच्छेद 41  कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार
अनुच्छेद42 काम की न्‍यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध
अनुच्छेद43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि
अनुच्छेद43क उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना
अनुच्छेद44 नागरिकों के लिए एक सामान नागरिक संहिता
अनुच्छेद45 बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध
अनुच्छेद46 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि
अनुच्छेद47 पोषाहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को ऊंचा करने तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य को सुधार करने का राज्‍य का कर्तव्‍य
अनुच्छेद48 कृषि और पशुपालन का संगठन
अनुच्छेद48क पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा वन्‍य जीवों की रक्षा
अनुच्छेद49 राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण देना
अनुच्छेद50 कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्‍करण
अनुच्छेद51 अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि
सविधान के अनुच्छेद 44 , 45 , 49 , 50 , और 51 पश्चिमी उदारवाद से प्रभावित निर्देशक तत्व है।

 


मौलिक अधिकार तथा नीति निर्देशक तत्व मे भेद


1. मौलिक अधिकारों में राजनितिक लोकतंत्र आदर्श निहित है जबकि निति निर्देशक तत्वों में आर्थिक लोकतंत्र का आदर्श निहित है।

2. मौलिक अधिकार राज्य की नकारात्मक भूमिका का वर्णन करते है वही ये तत्व राज्य की सकारात्मक भूमिका दायित्व का वर्णन करते है।

3. मौलिक अधिकार कड़े वैधानिक शब्दों मे वर्णित हैं, जब कि तत्व मात्र सामान्य भाषा में।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

No comments:

राजनीतिक सिद्धांत का परिचय

  राजनीतिक सिद्धांत का परिचय राजनीतिक सिद्धांत (Political Theory) राजनीति विज्ञान का एक महत्वपूर्ण और मूलभूत भाग है, जो राज्य, सरकार, सत्ता...