Wednesday, April 22, 2026

राजनीतिक सिद्धांत का परिचय

 


राजनीतिक सिद्धांत का परिचय

राजनीतिक सिद्धांत (Political Theory) राजनीति विज्ञान का एक महत्वपूर्ण और मूलभूत भाग है, जो राज्य, सरकार, सत्ता, न्याय, अधिकार, स्वतंत्रता और समानता जैसे विषयों का गहन अध्ययन करता है। यह केवल राजनीतिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का वर्णन ही नहीं करता, बल्कि उनके पीछे छिपे सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों की भी व्याख्या करता है। सरल शब्दों में, राजनीतिक सिद्धांत यह समझने का प्रयास करता है कि समाज में सत्ता का संगठन कैसे होना चाहिए और नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य क्या होने चाहिए।


राजनीतिक सिद्धांत का इतिहास बहुत पुराना है और इसकी जड़ें प्राचीन सभ्यताओं तक जाती हैं। प्राचीन यूनान में दार्शनिकों जैसे प्लेटो और अरस्तू ने राज्य और शासन के स्वरूप पर गहराई से विचार किया। प्लेटो ने अपनी पुस्तक "दि रिपब्लिक" में आदर्श राज्य की कल्पना की, जबकि अरस्तू ने विभिन्न शासन प्रणालियों का विश्लेषण किया और यह बताया कि कौन-सी व्यवस्था समाज के लिए बेहतर है। इसी प्रकार, भारत में भी कौटिल्य (चाणक्य) ने "अर्थशास्त्र" के माध्यम से राज्य और प्रशासन के सिद्धांतों को प्रस्तुत किया।


मध्यकाल में राजनीतिक सिद्धांत मुख्य रूप से धर्म के प्रभाव में था, जहाँ चर्च और राज्य के संबंधों पर अधिक ध्यान दिया गया। इसके बाद आधुनिक युग में राजनीतिक सिद्धांत ने एक नया रूप लिया, जिसमें व्यक्तिवाद, लोकतंत्र, अधिकार और स्वतंत्रता जैसे विचार प्रमुख हो गए। इस दौर में थॉमस हॉब्स, जॉन लॉक और जीन-जैक रूसो जैसे विचारकों ने सामाजिक अनुबंध (Social Contract) का सिद्धांत प्रस्तुत किया। इनके अनुसार, राज्य का निर्माण लोगों के बीच एक समझौते के आधार पर हुआ है, ताकि वे अपनी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रख सकें।


राजनीतिक सिद्धांत के मुख्य तत्वों में राज्य, सत्ता, अधिकार, न्याय, स्वतंत्रता और समानता शामिल हैं। राज्य एक संगठित राजनीतिक संस्था है, जो एक निश्चित क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर शासन करती है। सत्ता (Power) वह क्षमता है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति या संस्था दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करती है। अधिकार (Rights) वे सुविधाएँ और स्वतंत्रताएँ हैं जो नागरिकों को प्राप्त होती हैं, जबकि कर्तव्य (Duties) वे जिम्मेदारियाँ हैं जिन्हें उन्हें निभाना होता है।


न्याय (Justice) राजनीतिक सिद्धांत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह इस बात से संबंधित है कि समाज में संसाधनों का वितरण कैसे किया जाए और लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। न्याय के विभिन्न रूप होते हैं, जैसे सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय। स्वतंत्रता (Liberty) का अर्थ है व्यक्ति की वह स्थिति जिसमें वह बिना किसी अनावश्यक बाधा के अपने विचारों और कार्यों को व्यक्त कर सके। समानता (Equality) का अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को समान अवसर और अधिकार प्राप्त हों।
राजनीतिक सिद्धांत का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विचारधाराएँ (Ideologies) हैं।

 विचारधाराएँ वे संगठित विचारों के समूह होते हैं जो यह बताते हैं कि समाज और राज्य का स्वरूप कैसा होना चाहिए। प्रमुख राजनीतिक विचारधाराओं में उदारवाद (Liberalism), समाजवाद (Socialism), साम्यवाद (Communism) और राष्ट्रवाद (Nationalism) शामिल हैं। उदारवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों पर जोर देता है, जबकि समाजवाद सामाजिक समानता और संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण की वकालत करता है।


आधुनिक समय में राजनीतिक सिद्धांत केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यावहारिक जीवन से भी जुड़ा हुआ है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि सरकार कैसे काम करती है, नीतियाँ कैसे बनाई जाती हैं और नागरिकों की भूमिका क्या होती है। इसके माध्यम से हम लोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरणीय न्याय और वैश्वीकरण जैसे समकालीन मुद्दों का विश्लेषण कर सकते हैं।


राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन हमें एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायता करता है। यह हमें यह सिखाता है कि हमें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। साथ ही, यह हमें विभिन्न राजनीतिक विचारों और प्रणालियों की आलोचनात्मक समीक्षा करने की क्षमता प्रदान करता है।


निष्कर्षतः, राजनीतिक सिद्धांत केवल राजनीति का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह मानव समाज के संगठन और संचालन का एक व्यापक अध्ययन है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि एक आदर्श समाज कैसा होना चाहिए और उसे प्राप्त करने के लिए हमें क्या कदम उठाने चाहिए। इसलिए, राजनीतिक सिद्धांत का महत्व आज के समय में और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह हमें एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।





Saturday, April 18, 2026

महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान

 

                       महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान 


Important Facts


  • भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट है जो कि उत्तराखंड में है। इसमें राम गंगा नदी बहती है और इस राष्ट्रीय उद्यान का पुराना नाम हेली नेशनल पार्क है।

  • देश में सबसे ज्यादा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में है जिनकी संख्या 11 है।

  • देश में सबसे ज्यादा वन्य जीव अभ्यारण अंडमान एंड निकोबार में है जिनकी संख्या 94 है।

  • सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान हिमेश है जो कि जम्मू कश्मीर के लेह जनपद में है।

  • उत्तर प्रदेश में पीलीभीत अभ्यारण, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और चंद्रप्रभा अभ्यारण उल्लेखनीय है।

  • गुजरात में गिर राष्ट्रीय उद्यान, नल सरोवर अभ्यारण प्रमुख है।

  • बिहार में कैमूर अभ्यारण, भीम बांध अभ्यारण,वाल्मीकि नेशनल पार्क प्रमुख है।

  • झारखंड में हजारीबाग अभ्यारण, दालमा अभ्यारण तथा पलामू या बेतला अभ्यारण प्रमुख है।

  • उत्तराखंड में गोविंद राष्ट्रीय उद्यान नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान राजाजी राष्ट्रीय उद्यान जिम कार्बेट प्रमुख है।

  • कर्नाटक में गंधेर मुख्य राष्ट्रीय उद्यान, सोमेश्वर अभ्यारण,अंशी राष्ट्रीय उद्यान,तुंगभद्रा अभ्यारण,भद्र राष्ट्रीय उद्यान, बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान, बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान, नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख हैं।

  • तेलंगना में आंवला राष्ट्रीय उद्यान, पांखल राष्ट्रीय उद्यान, शिवराम राष्ट्रीय उद्यान, मंजीरा राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख है

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Wednesday, October 8, 2025

भारत का संवैधानिक विकास -Constitutional Development Of India



Impoertant Facts
Important Facts By Hema Choudhary 

 

भारत का संवैधानिक विकास


भारत का सवैधानिक विकास हमे ये बताता है कि किस तरह हमारा सविधान बना।भारत में संवैधानिक विकास की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 ईसा पूर्व से  मानी जा सकती है।ईस्ट इंडिया कंपनी अंग्रेज व्यापारियों का एक समूह था जिसमें ब्रिटिश सरकार ने भारत के साथ व्यापार करने का एक अधिकार प्रदान किया था। व्यापार की रक्षा के नाम पर यूरोपीय कंपनियों ने भारत में किलेबंदी करना और सेना रखना शुरू कर दिया। उनकी अपनी सैनिक शक्ति के दम पर इंडिया कंपनी जल्द ही भारतीय रियासतों के राजनीतिक तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने लगी और भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गई।

इसके लिए हम इस सवैधानिक विकास को निम्नलिखित पहलुओं के अनुसार समझने का प्रयास करेंगे।

इन पहलुओं के द्वारा हम महत्वपूर्ण विषयो की चर्चा करेंगे। जोकि इस प्रकार है-


1. 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट 

* इस अधिनियम द्वारा पहली बार ब्रिटिश शासन ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय मामलों के प्रशासन पर नियंत्रण स्थापित करना प्रारम्भ किया।

* रेगुलेटिंग एक्ट जैसे कि उसके नाम से ही स्पष्ट है। इस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश सरकार तथा संसद में पहली बार कंपनी की गतिविधियों को रेगुलेट करने या नियंत्रित करने के लिए नियम बनाकर हस्तक्षेप किया।

* इस अधिनियम के द्वारा बंबई के गर्वनर जनरल को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया।

* गवर्नर जनरल की सहायता के लिए 4 सदस्य की एक परिषद बनाई गई ,जिसमें गवर्नर जनरल को निर्णायक मत डालने का अधिकार दिया गया।

* वारेन हेस्टिंग पहले गवर्नर जनरल थे।

पहली परिषद के 4 सदस्य ये थे -

1 फिलिप फ्रांसिस 

2 क्लेवरिंग

3 बेयरविल  

4 मानसन

* 1774 में कोलकाता में एक सर्वोच्च न्यायालय के गठन की व्यवस्था की गई। इसमें एक मुख्य न्यायाधीश सहित तीन अन्य न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई। Chief justice एलेजा एंपे थी।इस न्यायालय को दीवानी फौजदारी जल सेना तथा धार्मिक मामलों में व्यापक अधिकार दिया गया। न्यायालय को यह भी अधिकार था कि वह कंपनी तथा सम्राट की सेवा में लगे व्यक्तियों के विरुद्ध मामले की सुनवाई कर सकता था इस न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध इंग्लैंड स्थित प्रिवी कौंसिल में अपील की जा सकती थी।

* गवर्नर जनरल को संचालकों (कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) के अधीन कर दिया गया।

* इस प्रकार कंपनी पर ब्रिटिश नियंत्रण को बढ़ा दिया गया।

* व्यापार की सभी सूचनाएं क्राउन को देना सुनिश्चित किया गया।

* कंपनी के कर्मचारी निजी व्यापार नहीं कर सकते हैं।

* कोर्ट ऑफ डायरेक्टर का कार्यकाल 1 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दिया गया।




2. पिट्स इंडिया एक्ट 1784

* इस अधिनियम के द्वारा दोहरी  व्यवस्था कायम की गई और संचालकों के ऊपर 6 सदस्य बोर्ड ऑफ कंट्रोल स्थापित किया गया।

* इस तरह संचालकों के अधिकतर कार्य  बोर्ड ऑफ कंट्रोल के हाथों में आ गए, लेकिन बोर्ड ऑफ कंट्रोल को नियुक्ति का अधिकार नहीं दिया गया।

* इस अधिनियम के तहत मद्रास व बंबई को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया।

* गवर्नर जनरल के परिषद की संख्या 4 से घटाकर तीन कर दी गई।

* इस एक्ट में पहली बार भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजी राज के प्रदेश कहा गया।

* बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्य को केवल ब्रिटिश सम्राट ही हटा सकता था। राज्य सचिव इसका अध्यक्ष होता था जिसे निर्णायक मत देने का अधिकार प्राप्त था।


यहां एक बात और ध्यान रखने योग्य है-

Board of control प्रशासनिक मामलों से संबंधित था।

Board of director राजनीतिक मामलों से संबंधित था।




                    3. चार्टर एक्ट 1793

*इस एक्ट के अंतर्गत 20 वर्षों के लिए कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को बढ़ा दिया गया।

*board of control के खर्च अब भारतीय राज्य से दिए जाने लगे। ( ये 1919 तक भारतीय राजस्व से खर्चे चलाते रहे)

* इस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल परिषद के निर्णय को बदल सकता था।


 कीथ के अनुसार 1793 का चार्टर वास्तव में संगठनकारी  था इस अधिनियम द्वारा पुरानी व्यवस्था को दृढ़ किया गया और नई धाराएं बहुत कम बनाई गई।



                                                           4. चार्टर एक्ट 1813

* इस एक्ट के द्वारा भारत में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को खत्म कर दिया गया किंतु चीन के साथ व्यापार करने और चाय के व्यापार में कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार बना रहा।

* इसके द्वारा ब्रिटिश व्यापारियों के लिए लाइसेंस के साथ भारत से व्यापार का अधिकार दिया गया।

* भारत में शिक्षा प्रसार के लिए ₹100000 का वार्षिक अनुदान मंजूर किया गया।

* इस अधिनियम के अंतर्गत हेलबेरी में कंपनी के लोक सेवकों के लिए एक प्रशिक्षण कॉलेज खोला गया।

* इस अधिनियम के अनुसार व्यापारियों और शासन संबंधी हिसाब-किताब अलग अलग रखे जाने की बात भी कही गई।

* ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।




                                                        5. 1833 का चार्टर एक्ट

* इस एक्ट के द्वारा कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को खत्म कर दिया गया और अब वह केवल राजनीतिक और प्रबंधक संस्था बनकर रह गई।

* इस अधिनियम पर मेकॉले व जेम्स मिल का गहरा प्रभाव था।

* बंगाल के गवर्नर जनरल कौन भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया।

* पहले भारतीय गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेटिक थे।

* इस अधिनियम के द्वारा यूरोपियों के लिए भारत के द्वार खोल दिए गए और उन्हें भारत में रहने व भूमि खरीदने के अधिकार दिए गए।

* शासन का केंद्रीकरण किया गया।

* बंगाल और मद्रास की सरकारों से कानून बनाने की शक्ति छीन ली गई और समस्त भारत के लिए कानून बनाने की शक्ति गवर्नर जनरल की परिषद को दे दी गई।

* इसके द्वारा परिषद की सदस्य संख्या 3 से बढ़ाकर चार कर दी गई चौथे सदस्य के रूप में विधि सदस्य के रूप में लॉर्ड मेकॉले को नियुक्त किया गया। अर्थात विधि आयोग का गठन किया गया।

* इस में दास प्रथा को खत्म किए जाने की बात कही गई और 1843 में इसे भारत में खत्म कर दिया गया।

* सरकारी सेवाओं को भारतीय नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया।

* Board of control के अध्यक्ष को भारतीय मामलों का मंत्री बना दिया गया ।

* इसमें कानून की संहिता करण पर बल दिया गया और एक विधि आयोग की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया।



                                                       6. चार्टर एक्ट 1853

* इस अधिनियम द्वारा कंपनी के शासन को ब्रिटिश संसद के आदेशों के अधीन कर दिया गया।

* भारतीय लोक सेवा (I C S) की परीक्षा सारी जनता के लिए खोल दी गई।

सबसे पहले आईसीएस की परीक्षा में भाग लेने वाले पहले भारतीय सत्येंद्र नाथ टैगोर थे।

* इस एक्ट में यह भी कहा गया कि भारतीय विधि आयोग की रिपोर्ट को देखने के लिए इंग्लैंड में भी एक विधि आयोग का गठन किया जाएगा।


 Important Facts By Hema Choudhary

Monday, January 15, 2024

General Knowledge-सामान्य ज्ञान



General Knowledge-सामान्य ज्ञान







 

Sunday, January 14, 2024

संज्ञा किसे कहते है?












 

Monday, March 20, 2023

Diwas-दिवस तिथि हिंदी में

Diwas-दिवस तिथि हिंदी में 

 

कब कौन सा दिवस मनाया जाता है। आज इस विषय में चर्चा करेंगे। महत्वूर्ण दिवस के बारे में जानेंगे जो की परीक्षा में भी पूछे जाते है। की किस तिथि को कौन सा दिवस मनाया जाता है। इसमें कुछ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस आते है। आइए पढ़ते है की कब कोण सा दिवस मनाया जाता है।


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Diwas-दिवस तिथि हिंदी में


Diwas-दिवस तिथि हिंदी में 

 

 

  1. भारत पर्यटन दिवस – 25 जनवरी

  2. गणतंत्र दिवस – 26 जनवरी

  3. अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद दिवस - 26 जनवरी

  4. सर्वोदय दिवस – 30 जनवरी

  5. शहीद दिवस – 30 जनवरी

  6. विश्व कैंसर दिवस – 4 feb

  7. गुलाब दिवस – 12 फरवरी

  8. वेलेंटाइन दिवस – 14 फरवरी

  9. अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस – 21 फरवरी

  10. केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस – 24 फरवरी

  11. राष्ट्रिय विज्ञानं दिवस – 28 फरवरी

  12. राष्ट्रिय सुरक्षा दिवस – 4 मार्च

  13. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस – 8 मार्च

  14. के०औ०सु० बल की स्थापना दिवस – 12 मार्च

  15. विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस – 15 मार्च

  16. आयुध निर्माण दिवस – 18 मार्च

  17. विश्व वानिकी दिवस – 21 मार्च

  18. विश्व जल दिवस – 22 मार्च

  19. भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहीद दिवस – 23 दिवस

  20. विश्व मौसम विज्ञानं दिवस – 23 मार्च

  21. राममनोहर लोहिया जयंती – 23 मार्च

  22. विश्व टी०बी० दिवस – 24 मार्च

  23. ग्रामीण डाक जीवन बिमा दिवस – 24 मार्च

  24. गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस – 25 मार्च

  25. बांग्लादेश का राष्ट्रिय दिवस– 26 मार्च

  26. विश्व थियेटर दिवस – 27 मार्च

  27. विश्व स्वास्थ दिवस – 7 अप्रैल

  28. अम्बेदकर जयंती – 14 अप्रैल

  29. विश्व वैमानिकी दिवस – 14 अप्रैल

  30. विश्व हीमोफीलिया दिवस – 17 अप्रैल

  31. विश्व विरासत दिवस – 18 अप्रैल

  32. पृथ्वी दिवस – 22 अप्रैल

  33. विश्व पुस्तक दिवस – 23 अप्रैल

  34. विश्व श्रमिक दिवस – 1 मई

  35. विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस – 3 मई

  36. विश्व प्रवासी पक्षी दिवस – 8 मई

  37. विश्व रेडक्रॉस दिवस – 8 मई

  38. अंतर्राष्ट्रीय थैलीसिमिया दिवस – 8 मई

  39. राष्ट्रिय प्रौधोगिकी दिवस – 11 मई

  40. विश्व संग्रहालय दिवस – 18 मई

  41. विश्व नर्स दिवस – 12 मई

  42. विश्व परिवार दिवस – 15 मई

  43. विश्व दूरसंचार दिवस – 17 मई

  44. आतंकवाद विरोधी दिवस – 21 मई

  45. जैविक विविधिता दिवस – 22 मई

  46. माउन्ट एवरेस्ट दिवस – 29 मई

  47. विश्व तम्बाकू रोधी दिवस – 31 मई

  48. विश्व पर्यावरण दिवस – 5 जून

  49. विश्व रक्तदान दिवस – 14 जून

  50. अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति स्थापना दिवस – 6 जून

  51. विश्व शरणार्थी दिवस – 20 जून

  52. राष्ट्रिय सांख्यिकी दिवस – 29 जून

  53. पी०सी० महालनोबिस का जन्म दिवस – 29 जून

  54. भारतीय स्टेट बैंक की स्थापना दिवस – 1 जुलाई

  55. चिकित्सक दिवस – 1 जुलाई

  56. डॉ० विधानचंद्र राय का जन्म दिवस – 1 जुलाई

  57. विश्व जनसंख्या दिवस – 11 जुलाई

  58. कारगिल स्मृति दिवस – 26 जुलाई

  59. विश्व स्तनपान दिवस – 1 अगस्त

  60. विश्व युवा दिवस – 12 अगस्त

  61. स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त

  62. राष्ट्रिय खेल दिवस – 29 अगस्त

  63. ध्यानचन्द्र का जन्म दिवस – 29 अगस्त

  64. शिक्षक दिवस – 5 सितम्बर

  65. अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस – 8 सितम्बर

  66. हिंदी दिवस – 14 सितम्बर

  67. विश्व-बंधुत्व एवं क्षमा याचना दिवस – 14 सितम्बर

  68. अभियंता दिवस – 15 सितम्बर

  69. संचयिता दिवस – 15 सितम्बर

  70. ओजोन परत रक्षण दिवस – 16 सितम्बर

  71. RPF की स्थापना दिवस – 20 सितम्बर

  72. विश्व शांति दिवस – 21 सितम्बर

  73. विश्व पर्यटन दिवस – 27 सितम्बर

  74. अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस – 1 अक्टूबर

  75. लाल बहादुर शास्त्री जयंती – 2 अक्टूबर

  76. अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस – 2 अक्टूबर

  77. विश्व प्रकृति दिवस – 3 अक्टूबर

  78. विश्व पशु-कल्याण दिवस – 4 अक्टूबर

  79. विश्व शिक्षक दिवस – 5 अक्टूबर

  80. विश्व वन्य प्राणी दिवस – 6 अक्टूबर

  81. वायु सेना दिवस – 8 अक्टूबर

  82. विश्व डाक दिवस – 9 अक्टूबर

  83. विश्व दृष्टि दिवस – 10 अक्टूबर

  84. जयप्रकाश जयंती – 11 अक्टूबर

  85. विश्व मानक दिवस – 14 अक्टूबर

  86. विश्व एलर्जी जागरूकता दिवस – 16 अक्टूबर

  87. विश्व खाद्य दिवस – 16 अक्टूबर

  88. विश्व आयोडीन अल्पता दिवस – 21 अक्टूबर

  89. संयुक्त राष्ट्र दिवस – 24 अक्टूबर

  90. विश्व मितव्ययिता दिवस – 30 अक्टूबर

  91. इंदिरा गाँधी की पुण्य तिथि – 31 अक्टूबर

  92. विश्व सेवा दिवस – 9 नवम्बर

  93. रा० विधिक साक्षरता दिवस – 9 नवम्बर

  94. बाल दिवस – 14 नवम्बर

  95. विश्व मधुमेह दिवस – 14 नवम्बर

  96. विश्व विधार्थी दिवस – 17 नवम्बर

  97. राष्ट्रिय पत्रकारिता दिवस – 17 नवम्बर

  98. विश्व व्यस्क दिवस – 18 नवम्बर

  99. विश्व नागरिक दिवस – 19 नवम्बर

  100. सार्वभौमिक बाल दिवस – 20 नवम्बर

  101. विश्व टेलीविजन दिवस – 21 नवम्बर

  102. विश्व मांसाहार निषेध दिवस – 25 नवम्बर

  103. विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस – 26 नवम्बर

  104. राष्ट्रिय विधि दिवस – 26 नवम्बर

  105. विश्व एड्स दिवस – 1 दिसम्बर

  106. नौसेना दिवस – 4 दिसम्बर

  107. रासायनिक दुर्घटना निवारण दिवस – 4 दिसम्बर

  108. अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस – 5 दिसम्बर

  109. नागरिक सुरक्षा दिवस – 6 दिसम्बर

  110. झंडा दिवस – 7 दिसम्बर

  111. अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन दिवस – 7 दिसम्बर

  112. अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस – 10 दिसम्बर

  113. विश्व बाल कोष दिवस – 11 दिसम्बर

  114. विश्व अस्थमा दिवस – 11 दिसम्बर

  115. राष्ट्रिय उर्जा संरक्षण दिवस – 14 दिसम्बर

  116. गोवा मुक्ति दिवस – 19 दिसम्बर

  117. किसान दिवस – 23 दिसम्बर

  118. राष्ट्रिय उपभोक्ता दिवस – 24 दिसम्बर

  119. CRPF का स्थापना दिवस – 28 दिसम्बर

 

 

 

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सविंधान का निर्माण- Samvidhan Ka Nirman

सविंधान का निर्माण- Samvidhan Ka Nirman

 

आज हम सविंधान निर्माण के बारे में महत्वपूर्ण बाते जानेंगे ,जो की एग्जाम के लिय बहुत आवश्यक है। इस से related प्रश्न एग्जाम में पूछे जाते है। संविधान के निर्माण में संविधान सभा के सभी 389 सदस्यो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , 26 नवम्बर 1949 को सविधान सभा ने सविंधान को पारित किया गया और इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था.भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च कानून है जो  कि देश की रूपरेखा को रेखांकित करता है जो मूल राजनीतिक संहिता साथ ही मौलिक अधिकारों मार्गदर्शक सिद्धांत और नागरिकों के कर्तव्य को चित्रित करता है।  यह संविधानिक सर्वोच्चता  प्रदान करता है।  



संविधान का अर्थ 


संविधान एक मौलिक कानून है, जो किसी देश को चलाने और , सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा बनाने  तथा कार्य का  निर्धारण करने तथा भारतीय  नागरिको के हितो का संरक्षण करने के लिए नियमो की रूपरेखा को दर्शाता है। अर्थार्थ संविधान देश को चलाने व सभी विभागों को सही रूप से कार्य करने के नियमो को लागू करता है। 


 
Samvidhan Ka Nirman

                                                  सविंधान का निर्माण- Samvidhan Ka Nirman






संविधान की प्रस्तावना




सविंधान सभा से संबंधीं कुछ महत्वपूर्ण बाते

 

1 सविंधान सभा के गठन का विचार सबसे पहले 1934 ऍम एन राय ने रखा था। ये वामपंथी आंदोलन के नेता थे।


2 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार सविधान के निर्माण के लिए आधिकारिक रूप से सविंधान सभा के गठन की मांग की गयी।


3 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की और से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने घोषणा की कि स्वतंत्र भारत के सविंधान का निर्माण वयस्क मताधिकार के आधारपर चुनी गयी सविंधान सभा द्वारा किआ जाएगा और कोई बहरी हस्तक्षेप नहीं होगा।

 

नेहरू जी की इस मांग को अंततः ब्रिटिश सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मान लिए गया। इसे सन् 1940 के अगस्त प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है।



सविंधान से सम्बन्धी कुछ महत्वपूर्ण बाते


* 1906 में दादा भाई नौरोजी ने पहली बार स्वराज शब्द का प्रयोग किया।

 
* 1924 में नेहरू जी ने सविंधान सभा की मांग की

 
* 1934 में ऍम एन रॉय ने सविंधान सभा के गठन का विचार रखा

 
* 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से सविंधान सभा के निर्माण की मांग की।

 
* 1946 कैबिनेट मिस्शन मे सविंधान सभा का मार्ग प्रशस्त किया गया।

यह मिस्शन 23 मार्च 1946 को कराची आया।
24 मार्च 1946 को दिल्ली आया था।

 
* 13 दिसंबर 1946 को पंडित नेहरू जी द्वारा उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया गया।

 
* 22 जनवरी 1947 को उद्देश्य प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाले पंडित नेहरू जी थे।

* लगभग 64 लाख रूपए के खर्च  के साथ संविधान लागू हुआ था।  

* भारतीय संविधान को बनने में 2 साल  11 माह और 18 दिन का समय लगा था।

* भारतीय संविधान विश्व ज है सबसे लम्बा लिखित संविधान है। 


* भारतीय संविधान में ज्यादातर प्रावधान  दूसरे देखो से लिए गए है इस कारण से इसे Bag of  Borrowing  भी कहा जाता है। 



सविधान निर्माण के समय कब क्या हुआ ?

  • संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी।  मुस्लिम लीग ने इसका बहिष्कार किया और पाकिस्तान की मांग पर बल दिया।   इसलिए  इस  बैठक में 211 सदस्यों ने हिस्सा लिया था।


  •   9 दिसंबर 1946 को संविधान की प्रथम बैठक में सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थाई सदस्य चुना गया।


  • 11 दिसंबर 1946 को बी एन राव को अपने संवैधानिक कानूनी सलाहकार और एच सी मुखर्जी को उपाध्यक्ष तथा राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष के रूप में चुना गया था । शुरुआत में कुल मिलाकर 389 सदस्य थे विभाजन के बाद 299 सदस्य थे । 389 सदस्यों में से 292 सदस्य सरकारी प्रांतों में से थे और चार मुख्य आयुक्त प्रांतों से थे और 93 रियासतों से थे।


  • 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव को पेश किया। इसमें कुल 8 अनुच्छेद शामिल थे।  


  •  22 जनवरी 1947 को उद्देश्य प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया और इस पर सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाले पंडित नेहरू थे। 

 

  • 26 November 1949  सविधान अंतिम रूप से लागू व पारित किया गया।

  • 26 जनवरी 1950  को शेष भाग लागू किया गया।

  • 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने संविधान को मंजूरी दी . 

  •  26 जनवरी 1950 को यह प्रभावी हो गया और भारत एक गणतंत्र राज्य  के रूप में उभर कर सामने आया। इसी कारण  26 जनवरी को हर वर्ष गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।


  • मई 1949 को राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्य का सत्यापन किया गया


  • 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को 3:2 में स्वीकार किया गया।


  • 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई।

इसी दिन राष्ट्रगान को स्वीकार किया गया और सर्वप्रथम 27 दिसंबर 1911 को पहली बार कोलकाता अधिवेशन में राष्ट्रगान गाया गया

 24 जनवरी 1950 को ही राष्ट्रीय गीत को स्वीकार किया गया और इसी दिन 

भारत के डॉ राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने ।


  • संविधान को तैयार  करने में  2 साल 11 महीने 18 दिन का समय लगा।  


  • संविधान को बनाते टाइम कुल 11 अधिवेशन हुए थे।  संविधान निर्माताओं ने लगभग 60 देशों के संविधानो  का अवलोकन किया था।  संविधान  के प्रारूप  पर 114 दिन तक विचार किया गया और अंतिम  बैठक  24 जनवरी 1950 को हुई थी और प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी।



  • भारतीय संविधान को लागू करते समय इसमें 395 अनुच्छेद 22 भाग और 28 अनुसूचियां थी। 

  •  वर्तमान में भारतीय संविधान में 448 अनुच्छेद 25 भाग और 12 अनुसूचियां है।  

 

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