| Important Facts By Hema Choudhary |
भारत का संवैधानिक विकास
भारत का सवैधानिक विकास हमे ये बताता है कि किस तरह हमारा सविधान बना।भारत में संवैधानिक विकास की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 ईसा पूर्व से मानी जा सकती है।ईस्ट इंडिया कंपनी अंग्रेज व्यापारियों का एक समूह था जिसमें ब्रिटिश सरकार ने भारत के साथ व्यापार करने का एक अधिकार प्रदान किया था। व्यापार की रक्षा के नाम पर यूरोपीय कंपनियों ने भारत में किलेबंदी करना और सेना रखना शुरू कर दिया। उनकी अपनी सैनिक शक्ति के दम पर इंडिया कंपनी जल्द ही भारतीय रियासतों के राजनीतिक तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने लगी और भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गई।
इसके लिए हम इस सवैधानिक विकास को निम्नलिखित पहलुओं के अनुसार समझने का प्रयास करेंगे।
इन पहलुओं के द्वारा हम महत्वपूर्ण विषयो की चर्चा करेंगे। जोकि इस प्रकार है-
1. 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
* इस अधिनियम द्वारा पहली बार ब्रिटिश शासन ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय मामलों के प्रशासन पर नियंत्रण स्थापित करना प्रारम्भ किया।
* रेगुलेटिंग एक्ट जैसे कि उसके नाम से ही स्पष्ट है। इस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश सरकार तथा संसद में पहली बार कंपनी की गतिविधियों को रेगुलेट करने या नियंत्रित करने के लिए नियम बनाकर हस्तक्षेप किया।
* इस अधिनियम के द्वारा बंबई के गर्वनर जनरल को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया।
* गवर्नर जनरल की सहायता के लिए 4 सदस्य की एक परिषद बनाई गई ,जिसमें गवर्नर जनरल को निर्णायक मत डालने का अधिकार दिया गया।
* वारेन हेस्टिंग पहले गवर्नर जनरल थे।
पहली परिषद के 4 सदस्य ये थे -
1 फिलिप फ्रांसिस
2 क्लेवरिंग
3 बेयरविल
4 मानसन
* 1774 में कोलकाता में एक सर्वोच्च न्यायालय के गठन की व्यवस्था की गई। इसमें एक मुख्य न्यायाधीश सहित तीन अन्य न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई। Chief justice एलेजा एंपे थी।इस न्यायालय को दीवानी फौजदारी जल सेना तथा धार्मिक मामलों में व्यापक अधिकार दिया गया। न्यायालय को यह भी अधिकार था कि वह कंपनी तथा सम्राट की सेवा में लगे व्यक्तियों के विरुद्ध मामले की सुनवाई कर सकता था इस न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध इंग्लैंड स्थित प्रिवी कौंसिल में अपील की जा सकती थी।
* गवर्नर जनरल को संचालकों (कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) के अधीन कर दिया गया।
* इस प्रकार कंपनी पर ब्रिटिश नियंत्रण को बढ़ा दिया गया।
* व्यापार की सभी सूचनाएं क्राउन को देना सुनिश्चित किया गया।
* कंपनी के कर्मचारी निजी व्यापार नहीं कर सकते हैं।
* कोर्ट ऑफ डायरेक्टर का कार्यकाल 1 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दिया गया।
2. पिट्स इंडिया एक्ट 1784
* इस अधिनियम के द्वारा दोहरी व्यवस्था कायम की गई और संचालकों के ऊपर 6 सदस्य बोर्ड ऑफ कंट्रोल स्थापित किया गया।
* इस तरह संचालकों के अधिकतर कार्य बोर्ड ऑफ कंट्रोल के हाथों में आ गए, लेकिन बोर्ड ऑफ कंट्रोल को नियुक्ति का अधिकार नहीं दिया गया।
* इस अधिनियम के तहत मद्रास व बंबई को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया।
* गवर्नर जनरल के परिषद की संख्या 4 से घटाकर तीन कर दी गई।
* इस एक्ट में पहली बार भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजी राज के प्रदेश कहा गया।
* बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्य को केवल ब्रिटिश सम्राट ही हटा सकता था। राज्य सचिव इसका अध्यक्ष होता था जिसे निर्णायक मत देने का अधिकार प्राप्त था।
यहां एक बात और ध्यान रखने योग्य है-
Board of control प्रशासनिक मामलों से संबंधित था।
Board of director राजनीतिक मामलों से संबंधित था।
3. चार्टर एक्ट 1793
*इस एक्ट के अंतर्गत 20 वर्षों के लिए कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को बढ़ा दिया गया।
*board of control के खर्च अब भारतीय राज्य से दिए जाने लगे। ( ये 1919 तक भारतीय राजस्व से खर्चे चलाते रहे)
* इस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल परिषद के निर्णय को बदल सकता था।
कीथ के अनुसार 1793 का चार्टर वास्तव में संगठनकारी था इस अधिनियम द्वारा पुरानी व्यवस्था को दृढ़ किया गया और नई धाराएं बहुत कम बनाई गई।
4. चार्टर एक्ट 1813
* इस एक्ट के द्वारा भारत में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को खत्म कर दिया गया किंतु चीन के साथ व्यापार करने और चाय के व्यापार में कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार बना रहा।
* इसके द्वारा ब्रिटिश व्यापारियों के लिए लाइसेंस के साथ भारत से व्यापार का अधिकार दिया गया।
* भारत में शिक्षा प्रसार के लिए ₹100000 का वार्षिक अनुदान मंजूर किया गया।
* इस अधिनियम के अंतर्गत हेलबेरी में कंपनी के लोक सेवकों के लिए एक प्रशिक्षण कॉलेज खोला गया।
* इस अधिनियम के अनुसार व्यापारियों और शासन संबंधी हिसाब-किताब अलग अलग रखे जाने की बात भी कही गई।
* ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।
5. 1833 का चार्टर एक्ट
* इस एक्ट के द्वारा कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को खत्म कर दिया गया और अब वह केवल राजनीतिक और प्रबंधक संस्था बनकर रह गई।
* इस अधिनियम पर मेकॉले व जेम्स मिल का गहरा प्रभाव था।
* बंगाल के गवर्नर जनरल कौन भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया।
* पहले भारतीय गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेटिक थे।
* इस अधिनियम के द्वारा यूरोपियों के लिए भारत के द्वार खोल दिए गए और उन्हें भारत में रहने व भूमि खरीदने के अधिकार दिए गए।
* शासन का केंद्रीकरण किया गया।
* बंगाल और मद्रास की सरकारों से कानून बनाने की शक्ति छीन ली गई और समस्त भारत के लिए कानून बनाने की शक्ति गवर्नर जनरल की परिषद को दे दी गई।
* इसके द्वारा परिषद की सदस्य संख्या 3 से बढ़ाकर चार कर दी गई चौथे सदस्य के रूप में विधि सदस्य के रूप में लॉर्ड मेकॉले को नियुक्त किया गया। अर्थात विधि आयोग का गठन किया गया।
* इस में दास प्रथा को खत्म किए जाने की बात कही गई और 1843 में इसे भारत में खत्म कर दिया गया।
* सरकारी सेवाओं को भारतीय नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया।
* Board of control के अध्यक्ष को भारतीय मामलों का मंत्री बना दिया गया ।
* इसमें कानून की संहिता करण पर बल दिया गया और एक विधि आयोग की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया।
6. चार्टर एक्ट 1853
* इस अधिनियम द्वारा कंपनी के शासन को ब्रिटिश संसद के आदेशों के अधीन कर दिया गया।
* भारतीय लोक सेवा (I C S) की परीक्षा सारी जनता के लिए खोल दी गई।
सबसे पहले आईसीएस की परीक्षा में भाग लेने वाले पहले भारतीय सत्येंद्र नाथ टैगोर थे।
* इस एक्ट में यह भी कहा गया कि भारतीय विधि आयोग की रिपोर्ट को देखने के लिए इंग्लैंड में भी एक विधि आयोग का गठन किया जाएगा।
