Monday, February 27, 2023

Important lakes in india -भारत की महत्वपूर्ण झीले

झील  पानी  का एक विशाल  भण्डार  है। जो  एक तालाब से बड़ी और गहरी  होती है। यह जमीन  से घिरा पानी   का  एक विशाल  पिंड है। झील समुद्र के समान नहीं है, और  यह समुद्र भी नहीं  है। कुछ  झीलें   विशाल होती हैं, फिर भी वे नदियों की तरह नहीं बहतीं।


भारत  में  कुछ  मीठे  पानी  की  झीलें, कई  मानव  निर्मित   झीलें और जलाशय हैं।  जो  ऊर्जा उत्पन्न  करने, या  सिंचाई, उद्योग या घरों में  पानी का उपयोग करने  के  लिए  बनाए   गए   है।

 

झील की परिभाषा  ---   एक झील पानी का एक स्रोत्र है जो भूमि से घिरा हुआ है। विश्व में लाखों झीलें हैं। वे हर महाद्वीप पर और हर तरह के वातावरण में पाए जाते हैं - पहाड़ों और रेगिस्तानों में, मैदानों पर और समुद्र के किनारे भी। झीलें आकार में अलग अलग होती हैं।

 

 

important lakes in india

 

Important lakes in india -भारत की महत्वपूर्ण झीले 

 

 

1 खारेपानी की झील विश्व में। • कैस्पियन सागर

2 विश्व मेंमीठेपानी की झील। सुपीररयर झील

3 कजावकस्तान और और उज़्बेवकस्तान सेजुडा सागर • अरल सागर

4 सबसे ऊंचाई पर स्थित झील • टीटीकाका झील

5 सबसे गहरी झील • बेकाल झील

6 अफ्रीका की सबसे बडी झील विक्टोररया झील

यह झील उगोंडा और तंजावनया ,दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय रेखा बनाती है

7 विश्व की सर्वाधिक लवणीय झील वान झील ( तुकी)

8 हजार झीलों की भूमि फ़िनलैंड

9 क्षेत्र के अनुसार झीलों का क्रम

             सुपीररयर,   विक्टोररया ,   बैकाल ,  ग्रेट बियर

10 यूरोपीय देश चारों तरफ से अन्य देशों से घिरा हुआ नही है स्पेन

11 विश्व की कौन सी झील हनीमून लेक कहलाती है टिटिकाका लेक , बोलीविया , पेरू

12 प्रसिद्ध उंगलीयो नूमा झील संयुक्त राज्य अमेरिका

13 पृथ्वी का सबसे गहरा स्थल मृत सागर

14 यूक्रेन की सीमा कैस्पियन झील से नही मिलती।

15 पर्ल ऑफ़ साइबेररया, बैकाल झील को कहा जाता है।

16 अफ्रीका महाद्वीप की सबसे बडी झील विक्टोररया झील

17 सर्वाधिक खारे जल की झील वान झील है यह फ़िनलैंड में सिथत है।सर्वाधिक लवणीय झील है।

18 विश्व की सर्वाधिक ऊंचाई पर सिथत झील टिटिकाका झील है। टिटिकाका झील एक नौकायन झील भी है।

19 टान्ले सेप नामक झील कंबोवडया में है।

20 राजस्थान में झीलों का शहर उदयपुर को कहा जाता है। उदयपुर मेवाड़ साम्राज्य की ऐतिहासिक राजधानी है।

21 उदयपुर की 5 झीले प्रमुख है

1 फतेहसागर झील

2 पिछोला झील

3 स्वरूप सागर झील

4 रंग सागर झील और

5 दूध तलाई झील

 

अन्य झीलें

 

जयसमंद झील,   आना सागर झील,  सिलीसेड झील,  बालसमंद झील,   गजनेर झील,  दुगारी झील,  बीसलसर झील,  घडसीसर झील,  पुष्कर झील,  फतेहसागर झील  फायसागर झील,   कोलायत झील, तलवाड़ा झील, बडी झील.

 

22 यूपी की फूलर झील

23 नक्की झील यह राजस्थान में है।

24 चिल्का झील उत्तरी सरकार तट पर है।

25 पैंगोंग झील , यह लद्दाख में है।

26 भारत की सबसे लंबी झील वेंबनाड झील है जो केरल में है ।

27 लोनार झील महाराष्ट्र में है जो की उल्कापात से बनी झील है।

28 जम्मूकश्मीर की कुछ प्रसिद्ध झीले

डल झील

शेषनाग झील

बेरीनाग झील

गाडसर झील

मानसबल झील

गंगाबल झील

कोसर नाग झील

नावगन झील।

29 सो मोरीरी झील लद्दाख में है।

30 सुखना झील चंडीगढ़ में है।

31 हिमाचल प्रदेश की प्रवसद्ध झीलें

भृगु झील

मशाल झील

मछीआल झील

रेणुका झील

सूरज ताल झील

चंद्रताल झील

घेपन झील ( यह बर्फ से ढकी हुई झील है.

32 उत्तराखंड की झीलें

नैनीताल झील

डोडीताल झील

भीमताल झील

सातताल झील

नौकु चियाताल झील

देव दास झील

खुरपताल झील

रकासताल झील

पीथमताल झील

मालाताल झील

रुपकुंठ झील •

33. कर्णाटक की झीलें

• बेलानदुर झील

• उक्कल झील

• कुक्कर झील

• कुक्करहल्ली झील

• कावेरी भीमेश्वर झील

34. केरल की झीलें

• पुनामदा झीलें

• अष्ट्मुदी झील

•वेमनाद झील

35. तेलांगना की झीलें

• हुसैन सागर झील

• नागार्जुन सागर झील

36 पोवाई झील। महाराष्ट्र

37 चोलामू झील या त्यों लहमो झील सिक्किम में है।

38 थोल झील और नल सरोवर झील गुजरात

39 वसात्रपुर झील     उत्तर परदेश

40 कांजिया झील , अंशुपा झील    ओडिसा ।  

Monday, February 13, 2023

पाठ 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल (पार्ट 4)

पाठ 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल। (पार्ट 3) भूगोल

पाठ 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल (Part 2)

पाठ 5 पृथ्वी के प्रमुख परिमंडल (पार्ट 1)

Sunday, February 12, 2023

भारतीय संविधान के भाग।। Parts of Indian constitution


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पाठ 6 पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप (पार्ट 2 )।। NCERT ।। Lesson 6 Major Lan...




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पाठ 6 पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप (पार्ट 1)

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Saturday, February 4, 2023

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त-Directive Principles In Hindi

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त-Directive Principles In Hindi




भारतीय सविंधान के भाग 4 , अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्तों का उल्लेख किया है। ये इच्छा पर निर्भर करते है।
इन्हे वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। इनके पीछे राजनितिक मान्यता है।
राज्य के नीति निर्देशक तत्व जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्व हैं।

 


राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त-Directive Principles In Hindi


राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त



सर्वप्रथम ये आयरलैंड के संविधान मे लागू किये गये थे। ये वे तत्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए है। भारतीय सविंधान के भाग 3 तथा 4 मिलकर संविधान की आत्मा तथा चेतना कहलाते है। इन तत्वों में संविधान तथा सामाजिक न्याय के दर्शन का वास्तविक तत्व निहित हैं। निति निर्देशक तत्व कार्यपालिका और विधायिका के वे तत्व हैं, जिनके अनुसार इन्हे अपने अधिकारों का प्रयोग करना होता है। वे राज्य के लिये ऐसे सामान्य निर्देश है कि राज्य कुछ ऐसे कार्य करे जो राज्य की जनता के लिये लाभदायक हो। इन निर्देशों का पालन कार्यपालिका की नीति तथा विधायिका की विधियाँ से हो सकता है।

 

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त -कुछ परिभाषाएँ



1. डॉ राजेंद्र प्रसाद अनुसार "राज्य निति निर्देशक सिद्धांतो का उदेश्य जनता के कल्याण को प्रोत्साहित करने वाली सामाजिक व्यवस्था
का करना है। "
2. वियर ने "इन्हे नैतिक उपदेश मात्र कहा है।"

हम भारत के निति निर्देशक तत्वों या सिद्धन्तो को निम्नलिखित अनुच्छेदों द्वारा भी समझ सकते है ,जिनमे इनका उल्लेख किया है। ...

 

राज्य के निति निर्देशक सिद्धान्त - सम्बंधित अनुच्छेद 



अनुच्छेद36  परिभाषा
अनुच्छेद37  इस भाग में कहा गया है की इन उपबंधों को किसी भी न्यायलय में बाध्यता नहीं दी जाएगी किन्तु फिर भी राज्य  के प्रशासन के लिए ये मूलभूत माने जाएंगे।
अनुच्छेद38  राज्‍य लोक कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा
अनुच्छेद39  राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्‍व
अनुच्छेद39क  समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता
अनुच्छेद40   ग्राम पंचायतों का संगठन
अनुच्छेद 41  कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार
अनुच्छेद42 काम की न्‍यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध
अनुच्छेद43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि
अनुच्छेद43क उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना
अनुच्छेद44 नागरिकों के लिए एक सामान नागरिक संहिता
अनुच्छेद45 बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध
अनुच्छेद46 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि
अनुच्छेद47 पोषाहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को ऊंचा करने तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य को सुधार करने का राज्‍य का कर्तव्‍य
अनुच्छेद48 कृषि और पशुपालन का संगठन
अनुच्छेद48क पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा वन्‍य जीवों की रक्षा
अनुच्छेद49 राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण देना
अनुच्छेद50 कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्‍करण
अनुच्छेद51 अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि
सविधान के अनुच्छेद 44 , 45 , 49 , 50 , और 51 पश्चिमी उदारवाद से प्रभावित निर्देशक तत्व है।

 


मौलिक अधिकार तथा नीति निर्देशक तत्व मे भेद


1. मौलिक अधिकारों में राजनितिक लोकतंत्र आदर्श निहित है जबकि निति निर्देशक तत्वों में आर्थिक लोकतंत्र का आदर्श निहित है।

2. मौलिक अधिकार राज्य की नकारात्मक भूमिका का वर्णन करते है वही ये तत्व राज्य की सकारात्मक भूमिका दायित्व का वर्णन करते है।

3. मौलिक अधिकार कड़े वैधानिक शब्दों मे वर्णित हैं, जब कि तत्व मात्र सामान्य भाषा में।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मौलिक अधिकार - Fundamental Rights In Hindi

 

                        मौलिक अधिकार

 


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मौलिक अधिकार - Fundamental Rights In Hindi 

"मौलिक अधिकार"  वे अधिकार है ,जो भारतीय सरकार द्वारा भारतीय लोगो को प्रदान किये गए है। मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वार हस्तक्षेप नही किया जा सकता। ये ऐसे अधिकार हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिये आवश्यक हैं और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नही कर सकता।

इन अधिकारों को मौलिक कहे जाने के कई कारण हैं जोकि इस प्रकार है :-

  •  इन अधिकारों को  देश के संविधान में स्थान दिया गया है तथा संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के अतिरिक्त    उनमें किसी   प्रकार का संशोधन नही किया जा सकता।
  •  ये अधिकार व्यक्ति के विकास के लिए बहुत ही जरुरी होते है इनके बिना व्यक्ति अपना सर्वांगिण विकास नहीं    कर  सकता। 
  •  ये अधिकार न्याय योग्य हैं तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से प्राप्त होते है। 
  •  इन अधिकारों का उल्लंघन नही किया जा सकता।
  •  मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण
 

 

मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण


भारतीय संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के PART 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक किया गया है। इन अधिकारों में अनुच्छेद 12, 13, 33, 34 तथा 35 क संबंध अधिकारों के सामान्य रूप से है। 44 वें संशोधन के पास होने के पूर्व संविधान में दिये गये मौलिक अधिकारों को सात श्रेणियों में बांटा जाता था परंतु इस संशोधन के अनुसार संपति के अधिकार को सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया गया। भारतीय नागरिकों को छ्ह मौलिक अधिकार प्राप्त है :-


1. समानता का अधिकार : अनुच्छेद 14 से 18 तक।
2. स्वतंत्रता का अधिकार : अनुच्छेद 19 से 22 तक।
3. शोषण के विरुध अधिकार : अनुच्छेद 23 से 24 तक।
4. धार्मिक स्वतंत्रता क अधिकार : अनुच्छेद 25 से 28 तक।
5. सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित अधिकार : अनुच्छेद 29 से 30 तक।
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार : अनुच्छेद 32

 

मौलिक अधिकारों को हम निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते है जिसमे ये निम्नलिखि अनुच्छेद आते है अर्थात मौलिक अधिकारों का वर्णन अनुच्छेद 12 से लकर 32 तक किया गया है इसे भारत का अधिकार पत्र भी कहा गया है अथार्त (Megna Carta) .इन मौलिक अधिकरों को हम इस प्रकार समझ सकते है :-
मूल अधिकार साधारण
अनुच्छेद 12 (परिभाषा)
अनुच्छेद 13 (मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियां।)

 

1 समता का अधिकार

अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समता)
अनुच्छेद 15 (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध)
अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता)
अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत)
अनुच्छेद 18 (उपाधियों का अंत)

 

2 स्वातंत्रय–अधिकार

अनुच्छेद 19 (वाक्–स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण)
अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण)
अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतन्त्रता का संरक्षण)

 

3 शोषण के विरूद्ध अधिकार

अनुच्छेद 23 (मानव के दुर्व्यापार और बलात्श्रय का प्रतिषेध)
अनुच्छेद 24 (कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध)

 

4 धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार

अनुच्छेद 25 (अंत: करण की और धर्म के अबोध रूप में मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता)
अनुच्छेद 26 (धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता)
अनुच्छेद 27 (किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करांे के संदाय के बारे में स्वतंत्रता)
अनुच्छेद 28 (कुछ शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत 

 

5 संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार

अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण)
अनुच्छेद 30 (शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार)
अनुच्छेद 31 (निरसति)

 


                                     कुछ विधियों की व्यावृत्ति


अनुच्छेद 31क (संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति)
अनुच्छेद 31ख (कुछ अधिनियमों और विनिमयों का विधिमान्यकरण)
अनुच्छेद 31ग (कुछ निदेशक तत्वों को प्रभावी करने वाली विधियों की व्यावृत्ति)
अनुच्छेद 31घ (निरसित)  

                                                                                                
 6 सांविधानिक उपचारों का अधिकार

अनुच्छेद 32     (इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित करने के लिए उपचार)
अनुच्छेद 32क    (निरसति) ।
अनुच्छेद 33    (इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का, बलों आदि को लागू होने में, उपांतरण करने की संसद की शक्ति)
अनुच्छेद 34    (जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का निर्बधन)
अनुच्छेद 35   (इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए विधान)                                                                                                                                                                                                                                                                                      
मैं आज आपको सविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों से सम्बंधित धाराओं के बारे में बताना चाहती हूँ।  जो एग्जाम में पूछे जाते है। हमारे सविधान में मोलिक अधिकारों का वर्णन भाग  3 में अनुछेद 12  से 32  तक किया  गया  है। किस अनुछेद में क्या कहा गया है ये भी एग्जाम में पूछ लिया जाता है जो की इस प्रकार है।    

         
अनुच्छेद 12    मूल अधिकारों की परिभाषा 


अनुच्छेद 13    मौलिक अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियों का उल्लेख 


अनुच्छेद 14    क़ानूनी समानता का अधिकार 

अनुच्छेद 15    भेदभाव निषेद 


अनुच्छेद 16    लोकसेवा में अवसर की समानता 


अनुच्छेद 17   असपृश्यता का अंत 


अनुच्छेद 18   उपाधियो का अंत 


अनुच्छेद 19   वाक् एवं अभिव्यक्ति  की  सव्तंत्रता 


अनुच्छेद 20   दोष सिद्घि सम्बंधित संरक्षण  का अधिकार 


अनुच्छेद 20 (c)  दोहरे  दंड से उन्मुक्ति 


अनुच्छेद 21       प्राण एवं दैहिक सव्तंत्रता 


अनुच्छेद 21 (a)  शिक्षा का अधिकार ( 6 से 14 वर्ष क बच्चो  को प्राथमिक शिक्षा का अधिकार )


अनुच्छेद 22      गिरफ्तारी व विरोध से संरक्षण


अनुच्छेद 23      मानव दुर्व्यापार  व बालत श्रम  का निषेध   


अनुच्छेद 24      14 वर्ष के बालको के लिए जोखिम भरे कार्य दण्डनीय 


अनुच्छेद 25     अन्तः करण की  सवतंत्रता के साथ धार्मिक सव्तंत्रता 


अनुच्छेद 26     धार्मिक मामलो का प्रबंध करने वाली सव्तंत्रता 


अनुच्छेद 27     धार्मिक विकास हेतु कर अदायगी से छूट 


अनुच्छेद 28     कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी 

अनुच्छेद 29 प्रत्येक वर्ग को भाषा,लिपि ,संस्कृति सुरक्षित रखने का अधिकार


अनुच्छेद 30 धर्म भाषा आधारित अल्पसंख्यको को शैक्षणिक संस्थान स्थापित
                  करने का अधिकार


अनुच्छेद 32   सवैधानिक उपचारो का अधिकार .

 

राजनीतिक सिद्धांत का परिचय

  राजनीतिक सिद्धांत का परिचय राजनीतिक सिद्धांत (Political Theory) राजनीति विज्ञान का एक महत्वपूर्ण और मूलभूत भाग है, जो राज्य, सरकार, सत्ता...